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इस पोस्ट में कंप्युटर क्या है ? कंप्युटर का पूरा परिचय- what is computer in hindi के बारे में पूरी जानकारी आसान हिंदी भाषा में समझाई गई है।
यदि आप इस टॉपिक के बारे में जानना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें।
Table of Contents
“कंम्प्यूटर एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक मशीन है” जो डाटा को प्रोसेस करने व आउटपुट प्रदान करने का कार्य करता है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रानिक उपकरण है, जो यूजर के द्वारा दिए गए गये डाटा या निर्देश को ग्रहण कर उन्हें प्रोसेस तथा स्टोर करता है और दिए गये डाटा का विश्लेषण कर आउटपुट डिस्प्ले करता है
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार,
“कम्प्यूटर एक ऐसा स्वचालित इलेक्ट्रानिक यंत्र है, जो विभिन्न प्रकार की तर्कपूर्ण गणनाओं के लिए उपयोग किया जाता है।”
एक शब्द में कहे तो कंम्प्यूटर डाटा को सूचना में परिवर्तित करता है।
कंम्प्यूटर 0 और 1 के रूप में डेटा प्राप्त करता है जिसे बाइनरी कोड कहा जाता है।
कंम्प्यूटर का आविष्कार 19वी सदी के प्रोफेसर “चार्ल्स बैबेज” ने किया था। इसलिए उन्हें कंम्प्यूटर का पिता भी कहा जाता है
हिन्दी में कंम्प्यूटर को ‘संगणक’ कहा जाता है।
कम्यूटर शब्द का उद्य लैटिन भाषा ke Computare शब्द से हुई है, जिसका अर्थ गढ़ना करना होता है ।
यह तार्किक और अंकगणितीय संक्रियाओं को करने मे सक्षम है।
कंप्यूटर का उपयोग जानकारी प्राप्त करना , दस्तावेज़ बनाना, ईमेल भेजना, गेम खेलना, ग्राफिक और गाने सुनने के लिए किया जा सकता है।
आज का युग कंप्युटर क्रांति का है वर्तमान मे घर हो या दफ्तर या स्कूल या कॉलेज हर जगह कंप्युटर मौजूद है। कंप्युटर की मदद से हम विभिन्न काम जैसे की ईमेल भेजना, दस्तावेज तैयार करना, संगीत सुनना, इंटरनेट मे पड़ी जानकारी खोजना, गेम खेलना, अनलाइन शॉपिंग, नौकरी की तलाश, टिकट बुकिंग, शिक्षा या संचार आदि कार्य आसानी से कर सकते है। कंप्युटर के कारण संवाद करना और भी सरल हो गया है, संचार केवेल लिखित रूप तक ही सीमित नई रह गया है बल्कि आधुनिक तकनीक के कारण कंप्युटर के द्वारा, ध्वनिया, विडिओ और ग्राफिक भी आसानी से भेजा जा सकता है। घर मे निजी कंप्युटर से आप बिलों का भुगतान, खर्चों का हिसाब , लेखा-जोखा, पैसों का लेनदेन आसानी से कर सकते है।
दिन प्रतिदिन नई तकनीक विकसित हो रही है इस डिजिटल क्रांति मे सफल होने के लिए कंप्युटर के बारे मे जानना बहुत ही जरूरी है इसके लिए सिर्फ टायपिंग सीखना ही काफी नहीं है बल्कि कंप्युटर के कॉन्सेप्ट और फंडामेंटल को समझना भी जरूरी है।
कम्प्यूटर का विकास और इतिहास :-
- 1450B.C. अबेकस (ABACUS) – कम्प्यूटर के विकास की शुरुआत आज से लगभग 2000 AC (इसापूर्व ) में हो गयी थी। 2000 AD (इसापूर्व) यानी 4000 वर्ष पहले चीन में एक यंत्र का निर्माण हुआ जिसे अबेकस “Abacus” कहा गया। कंप्यूटर के विकास का आधार अबेकस को ही माना जाता है अबेकस का पूरा नाम (“Abundant Beads Addition and Calculation Utility System”) है। इसे संसार का प्रथम गणना करने वाला यंत्र कहा जाता है यह एक प्राचीन गणना यंत्र है जिसका आविष्कार प्राचीन बेबीलोन में अंकों की गणना के लिए किया गया था यह सबसे पहला वह सरल यंत्र है इसमें क्षैतिज तारों में गोलाकार मोतिया पिरोई जाती है जिसकी सहायता से गड़ना को आसान बनाया गया है इसका प्रयोग जोड़ने व घटाने के लिए किया जाता था व वर्गमूल निकालने के लिए भी प्रयोग किया जाता था इसे आजकल बच्चों को प्राथमिक तौर पर गणना सीखने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- 1600 A.D. नैपियर बोंन्स (napier bones) – यह दूसरा गणना यंत्र था। जिसका आविष्कार एक स्कॉटलैंड के गणितज्ञ जॉन नैपियर ने किया था इसका निर्माण भी मुख्य रूप से गणना करने के लिए किया गया था। जॉन नैपियर ने उत्पादों और संख्याओं के भागफल की गणना करने के लिए सन 1617 ईस्वी में इस मशीन को बनाया था। जॉन नैपियर के द्वारा इस विधि को “रबडोलॉजी” भी कहा जाता था। तथा इसके इस्तेमाल से भागफल, गुना, भाग के अलावा वर्गमूल भी निकाला जा सकता था। इसमें गणनात्मक परिणाम को ग्राफिकल संरचना द्वारा दर्शाया जाता था। इसमें 10 आयताकार पत्तियों पर 0 से 9 तक के पहाडे इस प्रकार लिखे होते हैं कि एक पट्टी के दहाई अंक दूसरी पट्टी के इकाई के अंग के पास आ जाते थे कंप्यूटर के विकास के क्रम में यह दूसरी बड़ी खोज थी।
- 1642 A.D. ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) – फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल ने 1642 ईस्वी में गणना के काम को आसान करने के लिए केवल 19 वर्ष की आयु में प्रथम यांत्रिक गड़ना मशीन का आविष्कार किया। जिसे “पास्कलाइन” भी कहा जाता है। वह भौतिकाग्य के साथ-साथ धार्मिक दार्शनिक भी थे कंप्यूटर के विकास के क्रम में यह तीसरा व पहला मैकेनिक यंत्र बनाया गया जिससे गणना करना आसान हो सके। यह केवल जोड़ व घटा सकती थी इसलिए इसे एंडिंग मशीन (adding machine) भी कहा गया। यह प्रथम मैकेनिकल एंडिंग मशीन ऑटोमीटर एवं घड़ी के सिद्धांत पर कार्य करती थी। इसमें कई दातेयुक्त चक्रीया (toothed wheels) लगी होती थी जो घूमती रहती थी। चक्रीयो के दांतों पर 0 से 9 तक के अंक छापे रहते थे प्रत्येक चक्री का एक स्थानीय मान होता था जैसे- इकाई, दहाई,सैकड़ा आदि, इसमें एक चक्र घूमने के बाद दूसरी चक्र घूमती थी यह एक डब्बे के आकार का होता था।
- 1822 A.D. डिफरेंस इंजन (difference engine) – कंप्यूटर के जनक कहे जाने वाले चार्ल्स बैबेज 19वीं सदी के शुरू में ही एक मशीन बनाने का काम कर रहे थे जो जटिल गणनाएं कर सकता था। सन 1820 ई में डिफरेंस इंजन का डिजाइन बनाया गया था 1822 के अंत में उन्होंने 20 दशमलव क्षमता वाली मशीन डिफरेंस इंजन का विकास किया जो भाप से चलता था। इसमें डाटा को स्टोर तथा गणनाओं को प्रिंट भी किया जा सकता था कंप्यूटर के विकास के क्रम में यह सबसे महत्वपूर्ण चरण था। परंतु यह मशीन उनके समय में पूरी नहीं हो सकी बाद में उन्हीं के द्वारा तैयार किए गए डिजाइन से दूसरा डिफरेंस इंजन तैयार किया गया जो एक कमरे के आकार का था। 1937 ईस्वी में चार्ल्स बबेज की एक नोटबुक खोजी गई थी। जिसके आधार पर एक ब्रिटिश साइंटिस्ट ने 1991ई. में डिफरेंस इंजन-2 नाम की 31 डिजिट कैलकुलेशन वाली एक मशीन बनाई थी।
- 1800 A.D. जैक्वार्ड लूम (Jacquard Loom) – 19वीं सदी के शुरुआत में फ्रांस के जोसेफ मेरी जैक्वार्ड ने एक ऐसा प्रोग्राम किया जाने वाला लूम बनाया जिसने बनाई उद्योग में क्रांति ला दी। यह प्रथम मैकेनिकल लूम था। यह एक ऐसी बनाई मशीने थी जिसमें पंच कार्ड का उपयोग किया जाता था। जो जटिल पैटर्न बुनने में सक्षम थी। इसमें बुनाई के डिजाइन डालने के लिए छिद्र किए हुए कार्डों का उपयोग किया जाता था इसका उपयोग कपड़े बुनने के लिए किया जाता था। यह तकनीक 20 से 25 वर्ष पहले तक कपड़े बुनने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इसमें पंच कार्ड को प्रोग्राम करके एक पैटर्न को बार-बार बुना जा सकता था। जो प्रोग्रामिंग के एक प्राथमिक रूप को दर्शाता था। लूम के पंच कार्ड ने चार्ल्स बैबेज के एनालिटिकल इंजन के डिजाइन को प्रेरित किया था, जो एक प्रारंभिक कंप्यूटर था। जैक्वार्ड लूम ने इस अविष्कार में प्रोग्रामिंग,डाटा इनपुट और बाइनरी कोड जैसे विचारों को पेश किया, जो बाद में कंप्यूटरों में उपयोग किया जाने लगा। जिसने कंप्यूटर में आधुनिक जगत की नींव रखी।
- 1833A.D. एनालिटिकल इंजन (Analytical engine) – एनालिटिकल इंजन को हिंदी में विश्लेषणात्मक इंजन भी कहा जा सकता है। सन 1863 में चार्ल्स बैबेज ने एक स्वाचलित एनालिटिकल इंजन बनाया यह प्रथम जनरल पर्पस कंप्यूटर था। जो पंचकार्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करता था। यह एक मैकेनिक मशीन था। इसमें किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक घटक का उपयोग नहीं किया गया था, इसमें गियर, लीवर और अन्य यांत्रिक भागों का उपयोग किया गया था। यह मूलभूत सभी अंकगणितीय गणनाए (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) कर सकती थी। तथा डेटा को हमेशा के लिए स्टोर कर सकती थी। इस मशीन को आधुनिक कंप्यूटर का प्रारूप माना जाता है। यही कारण है कि चार्ल्स बैबेज को आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान का जनक फादर ऑफ़ मॉडर्न कंप्यूटर (father of modern computer)माना जाता है। लेडी ऑगस्टा एडा किंग, ने एनालिटिकल इंजन में पहला प्रोग्राम डाला। अतः उन्हें दुनिया का प्रथम प्रोग्रामर भी कहा जाता है।
- 1890 A.D. डॉ. हरमन होलेरिथ (dr.harman holerit) – चार्ल्स बैबेज के सेंसर टेबुलेटर एनालिटिकल इंजन के लगभग 50 वर्ष बाद अमेरिका के वैज्ञानिक हरमन डॉक्टर होलेरिथ ने इस प्रथम इलेक्ट्रिकट्रो मैकेनिकल मशीन का निर्माण किया। इस मशीन में पंचकार्डों की संख्या सहायता से आंकड़ों को संग्रहित किया जाता था इन पंचकार्डों को एक-एक करके मशीन में रखा जाता था टेबुलेटिंग मशीन पर लगी सुईया इन कार्डस से आंकड़ों को पढ़ने का कार्य करती थी इसमें संख्या पढ़ने का कार्य छिद्र किए हुए कार्डों से किया जाता था। हरमन होलेरिथ को पांच कार्डों के आविष्कार का श्रेय भी दिया जाता है। इसका प्रयोग 1890 ईस्वी में अमेरिकी जनगणना में किया गया। इस मशीन की सहायता से जनगणना का कार्य जो 7 वर्षों में पूरा होता था, वह अब 3 वर्षों में पूरा होने लगा सन। 1886 में हरमन होलेरिथ ने इस मशीन के व्यापार के लिए “टेबुलेटिग मशीन कंपनी” नामक एक कंपनी बनाई, जो बाद में जाकर एक विख्यात कंपनी आईबीएम (IBM)में विकसित हुई।
- 1939 A.D. ए.बी.सी. कंप्यूटर (ABC Computer) – सन 1939 में डॉ. जॉन अटानासॉफ और क्लिफोर्ड बेरी नामक वैज्ञानिकों ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन बनाई, जिसका नाम ए.बी.सी (ABC) रखा गया। ए.बी.सी शब्द का पूरा नाम अटानासॉफ बेरी (Atanasoff–Berry)था। जो इन्हीं के नाम पर रखा गया था यह संसार का पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था। ए.बी.सी में आंतरिक लॉजिक और स्टोरेज कैपेसिटर्स के लिए 300 वैक्यूम ट्यूब का उपयोग किया गया था। इसमें नियंत्रण और अंकगणिती गड़ना को करने के लिए बाइनरी नंबरों का उपयोग, लॉजिकल ऑपरेशन, मेमोरी कैपेसिटर, और इनपुट /आउटपुट इकाइयों के रूप में पंचकार्ड का उपयोग किया गया था।
- 1944 A.D. मार्क-1 (mark-1) – सन 1937 से 1944 के बीच आई.बी.एम् (इंटरनेशनल बिजनेस मशीन) (International Business Machines) नामक कंपनी के सहयोग तथा हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक हार्वर्ड आइकॉन के द्वारा बनाई गई विश्व की पहली पूर्ण स्वचालित (automatic) विधुत यांत्रिक कैलकुलेटिंग मशीन का आविष्कार किया गया। जिसे मार्क-1 नाम दिया गया। इसे ऑटोमेटिक सीक्वेंस कंट्रोल्ड के नाम से भी जाना जाता है। यह आंशिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल मशीन था या सरल शब्दों में कहें तो यह एक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल मैकेनिक मशीन था (जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल) दोनों और वो का प्रयोग किया गया था इसमें इंटरलॉकिंग, पैनल के छोटे गिलास, काउंटर, स्विच और नियंत्रण सर्किट का उपयोग किया गया था इसका प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया गया था इस मशीन ने अत्यधिक विश्वसनीयता हासिल की, परंतु यह डिजाइन में काफी जटिल और इसका आकार बहुत बड़ा था और आज के कंप्यूटर की तुलना में अत्यधिक धीमी गति से कार्य करता था। यह 55 फीट लंबी तथा 8 फीट ऊंची थी इसमें 3000 विद्युतीय स्विचों को लगाया गया था। यह पांच मूल अंकगणितीय कार्य जोड़, घटाना, गुणा, भाग तथा 23 दशमल अंको, तालिकाओ को करने में सक्षम था। यह दो संख्याओं को जोड़ने में लगभग 0.3 सेकंड तथा दो संख्याओं को गुणा करने में लगभग 4.5 सेकंड लेता था।
- 1953 आई.बी.एम्- 650 कंप्यूटर (IBM-650 computer) – आई.बी.एम् (IBM) जिसका पूरा नाम “International Business Machines” है जो सन 1911 में कंप्यूटिंग, टेबुलेटिग और रिकॉर्डिंग कंपनी (CTR) के नाम के रूप में शुरू हुई थी। 1924 में इसका नाम बदलकर आईबीएम (IBM)कर दिया गया। आईबीएम का मॉडल नंबर 650 उन शुरुआती मॉडलों में से एक था जिसका उपयोग भारी संख्या में लोगों ने किया, और यह बहुत ही प्रसिद्ध हुआ। पहले आईबीएम (IBM)की योजना इस मॉडल के केवल 50 कंप्यूटर बनाने की थी लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए 2000 से भी ज्यादा मॉडल को रिलीज किया गया है। इसने भविष्य के कंप्यूटरों के विकास की दिशा में अहम भूमिका निभाई, इसका उपयोग कई क्षेत्र में किया गया, जैसे वित्तीय गड़नाएं, वैज्ञानिक अनुसंधान, सरकारी योजनाएं, व्यावसायिक क्षेत्र और मार्केट के रिसर्च एनालिसिस। आईबीएम 650 एक दशमल-आधारित, स्टोर प्रोग्राम कंप्यूटर था। इसमें मैकेनिक मैग्नेटिक ड्रम का उपयोग किया गया था। यह उस समय के कंप्यूटर की तुलना सस्ता और आसान था। यह इनपुट/आउटपुट यूनिट, अल्फाबेट तथा स्पेशल कैरेक्टर को दो अंकिय डेसिमल कोड में परिवर्तन करता था। 1960 के बाद आईबीएम 650 कंप्यूटर को पुराना मान लिया गया और इसे धीरे-धीरे बंद कर दिया गया, लेकिन इसने जो आधुनिक कंप्यूटर जगत में योगदान दिया है उसे भूला नहीं जा सकता।
- 1946 एनिएक (ENIAC) – ENIAC का पुरा नाम “इलैक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कैलक्युलेटर” है। इसका निर्माण 1946 में अमेरिकी वैज्ञानिक प्रोफेसर जे. प्रेस्पर एकर्ट तथा जॉन मुचली के नेतृत्व में बनाई गयी टीम द्वारा पेनसिल्वानियां विश्वविद्यालय(अमेरिका), के मूर स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में किया गया था। उन्होंने आम आदमी की जरूरतो को देखते हुए आम आदमी के उपयोग के लिए पहले बड़े पैमाने के डिजिटल कम्प्यूटर को बनाने का काम पूरा किया।
इस कम्प्यूटर का वजन तीस टन था और इसमें निर्वात 18,000 वेक्यूम ट्यूब्स लगी थी। यह 30 × 50 वर्ग फुट के एक कमरे में एक दीवार के बराबर जगह घेरता था तीस बटा पचास फूट की जगह घेरने वाला यह कम्प्यूटर 160-170 किलोवाट बिजली से चलता था। जब पहली बार इस कम्प्यूटर को चलाया गया तो पूरे फिलेडेल्फिया क्षेत्र की बत्तियां मंद हो गई थी। इसकी गति बाकी कम्प्यूटरो से अधिक थी यह दो संख्याओं को 200 माइक्रोसेकण्ड्स में जोड़ तथा उन्हें 2000 माइक्रोसेण्ड्स में गुणा कर सकता था। यह बीस एक्युमुलेटर्स का एक संयोजन था सम्पूर्ण रूप से यह बड़े पैमाने वाला पहला इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर था। इसे टीम ने सैन्य जरूरतों की वजह से इसे बनाया था। इसका प्रयोग बैलिस्टिक से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए अनेक वर्षों तक किया गया तथा प्राइवेट फर्मों, इजीनियर्स रिसर्च एसोसिएशन और IBM में किया गया था।
- 1947इडबैक (EDVAC-Electronic Discrete Variable Auto-matic Computer) – एनिएक की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसके प्रोग्राम्स बोर्ड पर उलझे हुए थे जिसकी वजह से प्रोग्राम में परिवर्तन करना बहुत कठिन होता था। इससे निपटने के लिए डा. जॉन वॉन न्यूमॉन (Van Neumann) ने बाद में संग्रहित प्रोग्राम (Stored Program) की अवधारणा दी, जिसने इस कमी से छुटकारा दिलाने में सहायता की। इस सकल्पना के पीछे मूल विचार यह है कि इसकी संचालन प्रणाली को स्वचालित निर्देशन के लिए कम्प्यूटर की मेमोरी में निर्देशों के क्रम व डेटा को स्टोर किया जा सकता है। इस विशेषता ने निश्चित रूप से आधुनिक डिजिटल कम्प्यूटर्स के विकास को प्रभावित किया क्योंकि इससे उसी कम्प्यूटर पर विभिन्न प्रोग्राम्स को आसानी से लोड तथा सम्पन्न किया जा सकता है। इस विशेषता के कारण हम प्रायः स्टोर्ड प्रोग्राम डिजिटल कम्प्यूटर्स के रूप में आधुनिक डिजिटल कम्प्यूटर्स को संबोधित करते हैं। इलैक्ट्रॉनिक डिस्क्रीट वेरिएबल ऑटोमैटिक कम्प्यूटर (EDVAC) में अपनी डिजाइन में स्टोर्ड प्रोग्राम संकल्पना को प्रयोग किया गया है। स्टोर प्रोग्राम के साथ कम्प्यूटर के लॉजिकल डिजाइन में भी इसका प्रयोग किया गया। वॉन न्यूमॉन को दशमलव संख्याओं अथवा मानव द्वारा पठनीय शब्दों की बजाय बाइनरी रूप (वह प्रणाली जो सभी अक्षरों को प्रकट करने के लिए केवल दो अंकों- 0 तथा 1 का प्रयोग करती है) में डेटा व निर्देश दोनों को स्टोर करने के विचार को प्रतिपादित करने का श्रेय जाता है।आधुनिक कम्प्यूटर के विकास में सर्वाधिक योगदान अमेरिका के डॉ० वान न्यूमेन का है। इन्हें डाटा और अनुदेश (Instructions) दोनों को बाइनरी प्रणाली (0 और 1) में संग्राहित करने का श्रेय दिया जाता है।
- EDSAC (Electronic Delay Storage Automatic Calculator)
इसका पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक डिले स्टोरेज ऑटोमैटिक कैलकुलेटर (Electronic Delay Storage Automatic Calculator) है । इसे मौरिस विल्क्स और उनकी टीम ने इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में बनाया था। यह वॉन न्यूमैन के संग्रहित-प्रोग्राम सिद्धांत से प्रेरित था यह पहला पूरी तरह से काम करने वाला पहला संगृहीत प्रोग्राम (Stored Program) डिजिटल कम्प्यूटर था। जिसमे मैमोरी में निर्देश तथा डाटा स्टोर करने की क्षमता थी, ये लॉजिक के लिए वैक्यूम ट्यूब तथा मैमोरी के लिए मरकरी डिले लाइन का प्रयोग करता था। यह लगभग 800 जोड़ और 300 गुणा पर- सेकंड कर सकता था EDSAC को 11 जुलाई 1958 को बंद कर दिया गया, और इसकी जगह EDSAC 2 का उपयोग होने लगा , जो 1965 तक उपयोग में रहा।
- 1954 A.D. यूनीवैक (UNIVAC-Universal Automatic Computer): UNIVAC का पुरा नाम Universal Automatic Computer है। UNIVAC को John Presper Eckert और Jr John Mauchly द्वारा World War II के समय अमेरिका के लिए बनाया गया था। यह एक प्रथम कम्प्यूटर था जिसका उपयोग व्यापारिक और अन्यं सामान्य कार्यों के लिए किया गया। प्रथम व्यापारिक कम्प्यूटर यूनीवैक-1 (UNIVAC-I) का निर्माण 1954 में जीइसी (GEC-General Electric Corporation) ने किया। यह बड़ी मात्रा में इनपुट और आउटपुट के लिए मैग्नेटिक टेप का प्रयोग करता था इसका प्रयोग वाणिज्यिक कार्य के लिए किया जाता था और साथ प्रथम सामान्य उद्देश्य (General purpose) इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर था। उस समय UNIVAC का मूल्य बहुत ही अधिक था लगभग इसकी cost 1 करोड़ रुपये के आसपास थी।